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निःस्पृहो नाधिकारी स्यान् नाकामो मण्डनप्रियः ।
नाविदग्धः प्रियं ब्रूयात्स्पष्टवक्ता न वञ्चकः ॥

niḥspṛho nādhikārī syān nākāmo maṇḍanapriyaḥ |
nāvidagdhaḥ priyaṃ brūyātspaṣṭavaktā na vañcakaḥ ||

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He whose hands are clean does not like to hold an office; he who desires nothing cares not for bodily decorations; he who is only partially educated cannot speak agreeably; and he who speaks out plainly cannot be a deceiver

वह व्यक्ति जिसके हाथ स्वच्छ है कार्यालय में काम नहीं करना चाहता. जिस ने अपनी कामना को ख़तम कर दिया है, वह शारीरिक शृंगार नहीं करता, जो आधा पढ़ा हुआ व्यक्ति है वो मीठे बोल बोल नहीं सकता. जो सीधी बात करता है वह धोका नहीं दे सकता.

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