पुमांसं दाहयेत्पापं शयने तप्त आयसे ।
अभ्यादध्युश्च काष्ठानि तत्र दह्येत पापकृत् ।।

pumāṃsaṃ dāhayetpāpaṃ śayane tapta āyase |
abhyādadhyuśca kāṣṭhāni tatra dahyeta pāpakṛt ||

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पर-स्त्री से व्यभिचार (बलात्कार) करनेवाले मनुष्य को लोहे की तप्त (गर्म) शय्या पर सुलाकर, चारों ओर लकड़ी रखकर अग्नि लगा दे जिससे वह पापी भस्म हो जाए।

One forcefully imposing himself on a lady is to be laid on hot iron bed, surrounded by woodpiles and to be set ablaze so that sinner turns to ashes.

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पुमांसं दाहयेत्पापं शयने तप्त आयसे ।
अभ्यादध्युश्च काष्ठानि तत्र दह्येत पापकृत् ।।

pumāṃsaṃ dāhayetpāpaṃ śayane tapta āyase |
abhyādadhyuśca kāṣṭhāni tatra dahyeta pāpakṛt ||

पर-स्त्री से व्यभिचार (बलात्कार) करनेवाले मनुष्य को लोहे की तप्त (गर्म) शय्या पर सुलाकर, चारों ओर लकड़ी रखकर अग्नि लगा दे जिससे वह पापी भस्म हो जाए।
One forcefully imposing himself on a lady is to be laid on hot iron bed, surrounded by woodpiles and to be set ablaze so that sinner turns to ashes.

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