तस्मादसक्तः सततं कार्यं कर्म समाचर।
असक्तो ह्याचरन्कर्म परमाप्नोति पूरुषः।।

tasmādasaktaḥ satataṁ kāryaṁ karma samācara,
asakto hyācarankarma paramāpnoti pūruṣaḥ.

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इसलिए, तुम अनासक्त होकर सदैव कर्तव्य कर्म का सम्यक् आचरण करो; क्योकि, अनासक्त पुरुष कर्म करता हुआ परमात्मा को प्राप्त होता है।।

Swami Tejomayananda

इसलिये तू निरन्तर आसक्तिरहित होकर कर्तव्य-कर्मका भलीभाँति आचरण कर; क्योंकि आसक्तिरहित होकर कर्म करता हुआ मनुष्य परमात्माको प्राप्त हो जाता है।

Swami Ramsukhdas

अतः कर्मफल में आसक्त हुए बिना मनुष्य को अपना कर्तव्य समझ कर निरन्तर कर्म करते रहना चाहिए क्योंकि अनासक्त होकर कर्म करने से परब्रह्म (परम) की प्राप्ति होती है |

Therefore without attachment perform ever the work that is to be done (done for the sake of the world, lokasangraha, as is made clear immediately afterward); for by doing work without attachment man attains to the highest.

Sri Aurobindo
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