उपार्जितानां वित्तानां त्याग एव हि रक्षणम् ।
तडागोदरसंस्थानां परीवाह इवाम्भसाम् ॥

upārjitānāṃ vittānāṃ tyāga eva hi rakṣaṇam |
taḍāgodarasaṃsthānāṃ parīvāha ivāmbhasām ||

0
0

Accumulated wealth is saved by spending just as incoming fresh water is saved by letting out stagnant water.

संचित धन खर्च करने से बढ़ता है. उसी प्रकार जैसे ताजा जल जो अभी आया है बचता है, यदि पुराने स्थिर जल को निकल बहार किया जाये.

Share this Shlok
or

Know more about your Dev(i)

Trending Shloka

Chanakya Niti

उपार्जितानां वित्तानां त्याग एव हि रक्षणम् ।
तडागोदरसंस्थानां परीवाह इवाम्भसाम् ॥

upārjitānāṃ vittānāṃ tyāga eva hi rakṣaṇam |
taḍāgodarasaṃsthānāṃ parīvāha ivāmbhasām ||

Accumulated wealth is saved by spending just as incoming fresh water is saved by letting out stagnant water.
संचित धन खर्च करने से बढ़ता है. उसी प्रकार जैसे ताजा जल जो अभी आया है बचता है, यदि पुराने स्थिर जल को निकल बहार किया जाये.

@beLikeBrahma

website - brah.ma

Join Brahma

Learn Sanatan the way it is!