वेदाविनाशिनं नित्यं यएनमजमव्ययम्।
कथं स पुरूषः पार्थ कं घातयति हन्तिकम।।

Vedaavinaashinam nityam ya enam ajam avyayam;
katham sa purushah paarth kam ghaatayati hanti kam.

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हे पृथापुत्र अर्जुन!जो पुरूष इस आत्मा को नाशरहित ,नित्य ,अजन्मा और अव्यय जानता है,वह पुरूष कैसे किसको मरवाता है और कैस किसको मारता है?

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