यत्रोदकं तत्र वसन्ति हंसा-
स्तथैव शुष्कं परिवर्जयन्ति ।
न हंसतुल्येन नरेण भाव्यं
पुनस्त्यजन्तः पुनराश्रयन्ते ॥

यत्रोदकं तत्र वसन्ति हंसा-
स्तथैव शुष्कं परिवर्जयन्ति ।
न हंसतुल्येन नरेण भाव्यं
पुनस्त्यजन्तः पुनराश्रयन्ते ॥

1
0

Swans live wherever there is water, and leave the place where water dries up; let not a man act so — and come and go as he pleases.

हंस वहा रहते है जहा पानी होता है. पानी सूखने पर वे उस जगह को छोड़ देते है. आप किसी आदमी को ऐसा व्यवहार ना करने दे की वह आपके पास आता जाता रहे.

Share this Shlok
or

Know more about your Dev(i)

Trending Shloka

Chanakya Niti

यत्रोदकं तत्र वसन्ति हंसा-
स्तथैव शुष्कं परिवर्जयन्ति ।
न हंसतुल्येन नरेण भाव्यं
पुनस्त्यजन्तः पुनराश्रयन्ते ॥

यत्रोदकं तत्र वसन्ति हंसा-
स्तथैव शुष्कं परिवर्जयन्ति ।
न हंसतुल्येन नरेण भाव्यं
पुनस्त्यजन्तः पुनराश्रयन्ते ॥

Swans live wherever there is water, and leave the place where water dries up; let not a man act so — and come and go as he pleases.
हंस वहा रहते है जहा पानी होता है. पानी सूखने पर वे उस जगह को छोड़ देते है. आप किसी आदमी को ऐसा व्यवहार ना करने दे की वह आपके पास आता जाता रहे.

@beLikeBrahma

website - brah.ma

Join Brahma

Learn Sanatan the way it is!