श्रीमद् शंकराचार्य विरचितम् लघु अन्नपूर्णा स्तोत्र

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Sri Laghu Annapurna Stotram

भगवति भवरोगात् पीडितं दुष्कृतोत्यात् ।

सुतदुहितृकलत्र उपद्रवेणानुयातम् ।

विलसदमृतदृष्ट्या वीक्ष विभ्रान्तचित्तम् ।

सकलभुवनमातस्त्राहि माम् ॐ नमस्ते ॥ १ ॥

माहेश्र्वरीमाश्रितकल्पवल्ली

महंभवोच्छेदकरीं भवानीम् ।

क्षुधार्तजायातनयाद्दुपेत

स्त्वान्नपूर्णे शरणं प्रपद्दे ॥ २ ॥

दारिद्र्यदावानलदह्यमानम् ।

पाह्यन्नपूर्णे गिरिराजकन्ये ।

कृपाम्बुधौ मज्जय मां त्वदीये ।

त्वपादपद्मार्पितचित्तवृतिम् ॥ ३ ॥

दूत्थन्नपूर्णास्तुतिरत्नमेतत् ।

श्लोकत्रयं यः पठतीह भक्त्या ।

तस्मै ददात्यन्नसमृद्धिमम्बा ।

श्रियं च विद्दां च यशश्र्च मुक्तिम् ॥ ४ ॥ ॥

॥ इति श्रीमद् शंकराचार्य विरचितम् श्री लघु अन्नपूर्णास्तोत्रम् संपूर्णम् ॥

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