Verses · Meaning · Recitation · Details
॥
Kamakshi Devi Ki Aarti
Also known as: Kamakshi Devi Aarti
Kamakshi Devi Aarti
daily aarti·shakta·bhakti
6 verses
VERSE 0
आरती कामाक्षा देवी की । जगत् उधारक सुर सेवी की ॥ आरती कामाक्षा देवी की ।
VERSE 1
गावत वेद पुरान कहानी । योनिरुप तुम हो महारानी ॥ सुर ब्रह्मादिक आदि बखानी । लहे दरस सब सुख लेवी की ॥ आरती कामाक्षा देवी की ।
VERSE 2
दक्ष सुता जगदम्ब भवानी । सदा शंभु अर्धंग विराजिनी । सकल जगत् को तारन करनी । जै हो मातु सिद्धि देवी की ॥ आरती कामाक्षा देवी की ।
VERSE 3
तीन नयन कर डमरु विराजे । टीको गोरोचन को साजे । तीनों लोक रुप से लाजे । जै हो मातु ! लोक सेवी की ॥ आरती कामाक्षा देवी की ।
VERSE 4
रक्त पुष्प कंठन वनमाला । केहरि वाहन खंग विशाला । मातु करे भक्तन प्रतिपाला । सकल असुर जीवन लेवी की ॥ आरती कामाक्षा देवी की ।
VERSE 5