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अहो बत विचित्राणि चरितानि महात्मनाम् ।
लक्ष्मीं तृणाय मन्यन्ते तद्भारेण नमन्ति च ॥

aho bata vicitrāṇi caritāni mahātmanām |
lakṣmīṃ tṛṇāya manyante tadbhāreṇa namanti ca ||

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O see what a wonder it is! The doings of the great are strange: they treat wealth as light as a straw, yet, when they obtain it, they bend under its weight.

देखिये क्या आश्चर्य है? बड़े लोग अनोखी बाते करते है. वे पैसे को तो तिनके की तरह मामूली समझते है लेकिन जब वे उसे प्राप्त करते है तो उसके भार से और विनम्र होकर झुक जाते है.

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