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अपुत्रस्य गृहं शून्यं दिशः शून्यास्त्वबान्धवाः ।
मूर्खस्य हृदयं शून्यं सर्वशून्या दरिद्रता ॥

 

aputrasya gṛhaṃ śūnyaṃ diśaḥ śūnyāstvabāndhavāḥ |
mūrkhasya hṛdayaṃ śūnyaṃ sarvaśūnyā daridratā ||

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The house of a childless person is a void, all directions are void to onewho has no relatives, the heart of a fool is also void, but to a poverty stricken man all is void.

जिस व्यक्ति के पुत्र नहीं है उसका घर उजाड़ है. जिसे कोई सम्बन्धी नहीं है उसकी सभी दिशाए उजाड़ है. मुर्ख व्यक्ति का ह्रदय उजाड़ है. निर्धन व्यक्ति का सब कुछ उजाड़ है.

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