दर्शनध्यानसंस्पर्शैर्मत्सी कूर्मी च पक्षिणी ।
शिशुं पालयते नित्यं तथा सज्जन-संगतिः ॥

darśanadhyānasaṃsparśairmatsī kūrmī ca pakṣiṇī |
śiśuṃ pālayate nityaṃ tathā sajjana-saṃgatiḥ ||

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As long as your body is healthy and under control and death is distant, try to save your soul; when death is immanent what can you

जैसे मछली दृष्टी से, कछुआ ध्यान देकर और पंछी स्पर्श करके अपने बच्चो को पालते है, वैसे ही संतजन पुरुषों की संगती मनुष्य का पालन पोषण करती है.

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दर्शनध्यानसंस्पर्शैर्मत्सी कूर्मी च पक्षिणी ।
शिशुं पालयते नित्यं तथा सज्जन-संगतिः ॥

darśanadhyānasaṃsparśairmatsī kūrmī ca pakṣiṇī |
śiśuṃ pālayate nityaṃ tathā sajjana-saṃgatiḥ ||

As long as your body is healthy and under control and death is distant, try to save your soul; when death is immanent what can you
जैसे मछली दृष्टी से, कछुआ ध्यान देकर और पंछी स्पर्श करके अपने बच्चो को पालते है, वैसे ही संतजन पुरुषों की संगती मनुष्य का पालन पोषण करती है.

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