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दूतो न सञ्चरति खे न चलेच्च वार्ता
पूर्वं न जल्पितमिदं न च सङ्गमोऽस्ति ।
व्योम्नि स्थितं रविशाशिग्रहणं प्रशस्तं
जानाति यो द्विजवरः स कथं न विद्वान् ॥

dūto na sañcarati khe na calecca vārtā
pūrvaṃ na jalpitamidaṃ na ca saṅgamo’sti |
vyomni sthitaṃ raviśāśigrahaṇaṃ praśastaṃ
jānāti yo dvijavaraḥ sa kathaṃ na vidvān ||

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No messenger can travel about in the sky and no tidings come from there. The voice of its inhabitants as never heard, nor can any contact be established with them. Therefore the brahmana who predicts the eclipse of the sun and moon which occur in the sky must be considered as a vidwan (man of great learning).

कोई संदेशवाहक आकाश में जा नहीं सकता और आकाश से कोई खबर आ नहीं सकती. वहा रहने वाले लोगो की आवाज सुनाई नहीं देती. और उनके साथ कोई संपर्क नहीं हो सकता. इसीलिए वह ब्राह्मण जो सूर्य और चन्द्र ग्रहण की भविष्य वाणी करता है, उसे विद्वान मानना चाहिए.

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