द्वाविमौ पुरुषौ लोके क्षरश्चाक्षर एव च ।
क्षरः सर्वाणि भूतानि कूटस्थोऽक्षर उच्यते

dvāvimau puruṣau lōkē kṣaraścākṣara ēva ca.
kṣaraḥ sarvāṇi bhūtāni kūṭasthō.kṣara ucyatē

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ଏହି ସଂସାରରେ କ୍ଷର ଓ ଅକ୍ଷର ଏହି ପରି ଦୁଇ ପ୍ରକାର ପୁରୁଷ ଅଛନ୍ତି ସମସ୍ତ ପ୍ରାଣୀଙ୍କୁ କ୍ଷର ଓ କୂଟସ୍ଥ ବୀଜାତ୍ମାଙ୍କୁ ଅକ୍ଷର ବୋଲି କୁହାଯାଏ

हे अर्जुन! संसार में दो प्रकार के ही जीव होते हैं एक नाशवान (क्षर) और दूसरे अविनाशी (अक्षर), इनमें समस्त जीवों के शरीर तो नाशवान होते हैं और समस्त जीवों की आत्मा को अविनाशी कहा जाता है

There are two kinds of beings in creation, the kṣhar (perishable) and the akṣhar (imperishable). The perishable are all beings in the material realm. The imperishable are the the liberated beings

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