एकवर्णं यथा दुग्धं भिन्नवर्णासु धेनुषु।
तथैव धर्मवैचित्र्यं तत्त्वमेकं परं स्मृतम्॥

ekavarnan yathaa dugdham bhinnavarnaasu dhenushu।

tathaiv dharmvaichitryan tattvmekan paran smriatam॥

जिस प्रकार विविध रंग रूप की गायें एक ही रंग का (सफेद) दूध देती है, उसी प्रकार विविध धर्मपंथ एक ही तत्त्व की सीख देते है।

Share this Shlok
Share on facebook
Share on twitter
Share on linkedin
Share on whatsapp
Share on telegram

More Shloka to explore

A futuristic Library of Bhartiye Wisdom.

Brahma is building the biggest open-source collection of eternal Bhartiye Gyan in all forms. If you are enlightened do join our team of change-makers.

Brahma Logo - White
एकवर्णं यथा दुग्धं भिन्नवर्णासु धेनुषु। तथैव धर्मवैचित्र्यं तत्त्वमेकं परं स्मृतम्॥

एकवर्णं यथा दुग्धं भिन्नवर्णासु धेनुषु।
तथैव धर्मवैचित्र्यं तत्त्वमेकं परं स्मृतम्॥

ekavarnan yathaa dugdham bhinnavarnaasu dhenushu।

tathaiv dharmvaichitryan tattvmekan paran smriatam॥

जिस प्रकार विविध रंग रूप की गायें एक ही रंग का (सफेद) दूध देती है, उसी प्रकार विविध धर्मपंथ एक ही तत्त्व की सीख देते है।

@beLikeBrahma