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एकवर्णं यथा दुग्धं भिन्नवर्णासु धेनुषु।
तथैव धर्मवैचित्र्यं तत्त्वमेकं परं स्मृतम्॥

ekavarnan yathaa dugdham bhinnavarnaasu dhenushu।

tathaiv dharmvaichitryan tattvmekan paran smriatam॥

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जिस प्रकार विविध रंग रूप की गायें एक ही रंग का (सफेद) दूध देती है, उसी प्रकार विविध धर्मपंथ एक ही तत्त्व की सीख देते है।

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एकवर्णं यथा दुग्धं भिन्नवर्णासु धेनुषु। तथैव धर्मवैचित्र्यं तत्त्वमेकं परं स्मृतम्॥

एकवर्णं यथा दुग्धं भिन्नवर्णासु धेनुषु।
तथैव धर्मवैचित्र्यं तत्त्वमेकं परं स्मृतम्॥

ekavarnan yathaa dugdham bhinnavarnaasu dhenushu।

tathaiv dharmvaichitryan tattvmekan paran smriatam॥

जिस प्रकार विविध रंग रूप की गायें एक ही रंग का (सफेद) दूध देती है, उसी प्रकार विविध धर्मपंथ एक ही तत्त्व की सीख देते है।

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