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मूर्खस्तु प्रहर्तव्यः प्रत्यक्षो द्विपदः पशुः ।
भिद्यते वाक्य-शल्येन अदृशं कण्टकं यथा ॥

mūrkhastu prahartavyaḥ pratyakṣo dvipadaḥ paśuḥ |
bhidyate vākya-śalyena adṛśaṃ kaṇṭakaṃ yathā ||

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Do not keep company with a fool for as we can see he is a two-legged beast. Like an unseen thorn he pierces the heart with his sharp words.

मूर्खो के साथ मित्रता नहीं रखनी चाहिए उन्हें त्याग देना ही उचित है, क्योंकि प्रत्यक्ष रूप से वे दो पैरों वाले पशु के सामान हैं,जो अपने धारदार वचनो से वैसे ही हदय को छलनी करता है जैसे अदृश्य काँटा शारीर में घुसकर छलनी करता है .

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