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निर्विषेणापि सर्पेण कर्तव्या महती फणा ।
विषमस्तु न चाप्यस्तु घटाटोपो भयङ्करः ॥

nirviṣeṇāpi sarpeṇa kartavyā mahatī phaṇā |
viṣamastu na cāpyastu ghaṭāṭopo bhayaṅkaraḥ ||

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The serpent may, without being poisonous, raise high its hood, but the show of terror is enough to frighten people — whether he be venomous or not

यदि नाग अपना फना खड़ा करे तो भले ही वह जहरीला ना हो तो भी उसका यह करना सामने वाले के मन में डर पैदा करने को पर्याप्त है. यहाँ यह बात कोई माइना नहीं रखती की वह जहरीला है की नहीं.

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