सेवितव्यो महावृक्ष: फ़लच्छाया समन्वित:।
यदि देवाद फलं नास्ति,छाया केन निवार्यते।।

sevitavyo mahāvṛkṣa: pha़lacchāyā samanvita:|
yadi devāda phalaṃ nāsti,chāyā kena nivāryate||

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एक विशाल वृक्ष की सेवा करनी चाहिए। क्योंकि वह फल और छाया से युक्त होता है। यदि किसी दुर्भाग्य से फल नहीं देता तो उसकी छाया कोई नहीं रोक सकता है।

बड़े पेड़ों की सेवा करनी चाहिए उनसे फल और छाया दोनों मिलते हैं। यदि दैवयोग से फल न भी मिले छाया तो मिल ही जाती है।

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