शुनः पुच्छमिव व्यर्थं जीवितं विद्यया विना ।
न गुह्यगोपने शक्तं न च दंशनिवारणे ॥

śunaḥ pucchamiva vyarthaṃ jīvitaṃ vidyayā vinā |
na guhyagopane śaktaṃ na ca daṃśanivāraṇe ||

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The life of an uneducated man is as useless as the tail of a dog which neither covers its rear end, nor protects it from the bites of insects.

एक अनपढ़ आदमी की जिंदगी किसी कुत्ते की पूछ की तरह बेकार है. उससे ना उसकी इज्जत ही ढकती है और ना ही कीड़े मक्खियों को भागने के काम आती है.

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शुनः पुच्छमिव व्यर्थं जीवितं विद्यया विना ।
न गुह्यगोपने शक्तं न च दंशनिवारणे ॥

śunaḥ pucchamiva vyarthaṃ jīvitaṃ vidyayā vinā |
na guhyagopane śaktaṃ na ca daṃśanivāraṇe ||

The life of an uneducated man is as useless as the tail of a dog which neither covers its rear end, nor protects it from the bites of insects.
एक अनपढ़ आदमी की जिंदगी किसी कुत्ते की पूछ की तरह बेकार है. उससे ना उसकी इज्जत ही ढकती है और ना ही कीड़े मक्खियों को भागने के काम आती है.

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