सुरासम्पूर्णकलशं रुधिराप्लुतमेव च ।
दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्माण्डा शुभदाऽस्तु मे ॥

surāsampūrṇakalaśaṃ rudhirāplutameva ca |
dadhānā hastapadmābhyāṃ kūṣmāṇḍā śubhadā’stu me ||

जो कलश मदिरा से भरा हुआ है, रुधिर अर्थात् रक्त से लथपथ है। ऐसे कलश को माँ भगवती ने अपने दोनों कर कमलों में धारण किया है। ऐसी मां कूष्माण्डा मुझे शुभता अर्थात् कल्याण प्रदान करें।

Goddess Kushmanda who holds two pitchers full of Madira and Blood in her lotus hands, be propitious to me.

Share this Shlok
Share on facebook
Share on twitter
Share on linkedin
Share on whatsapp
Share on telegram

Trending Shloka

Latest Shloka in our Sangrah

A futuristic Library of Bhartiye Wisdom.

Brahma is building the biggest open-source collection of eternal Bhartiye Gyan in all forms. If you are enlightened do join our team of change-makers.

सुरासम्पूर्णकलशं रुधिराप्लुतमेव च ।
दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्माण्डा शुभदाऽस्तु मे ॥

surāsampūrṇakalaśaṃ rudhirāplutameva ca |
dadhānā hastapadmābhyāṃ kūṣmāṇḍā śubhadā’stu me ||

जो कलश मदिरा से भरा हुआ है, रुधिर अर्थात् रक्त से लथपथ है। ऐसे कलश को माँ भगवती ने अपने दोनों कर कमलों में धारण किया है। ऐसी मां कूष्माण्डा मुझे शुभता अर्थात् कल्याण प्रदान करें।
Goddess Kushmanda who holds two pitchers full of Madira and Blood in her lotus hands, be propitious to me.

@beLikeBrahma