तस्मात्सर्वेषु कालेषु मामनुस्मर युद्ध च।
मय्यर्पितमनोबुद्धिर्मामेवैष्यस्यसंशयम्‌॥

Tasmaat sarveshu kaaleshu maamanusmara yudhya cha;
Mayyarpitamanobuddhir maamevaishyasyasamshayam.

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इसलिए हे अर्जुन! तू सब समय में निरंतर मेरा स्मरण कर और युद्ध भी कर। इस प्रकार मुझमें अर्पण किए हुए मन-बुद्धि से युक्त होकर तू निःसंदेह मुझको ही प्राप्त होगा

Therefore, at all times remember Me only and fight. With mind and intellect fixed (orabsorbed) in Me, thou shalt doubtless come to Me alone.

ତେଣୁ ସର୍ବଦା ମତେ ହିଁ ସ୍ମରଣ କରି ଯୁଦ୍ଧକର ଏବଂ ମୋ ଠାରେ ମନ ବୁଦ୍ଧି ସମର୍ପଣ କରିଦେଲେ ମତେ ପ୍ରାପ୍ତହେବ ଏହା ନିସନ୍ଦେହ ।

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