विद्या ददाति विनयं विनयाद्याति पात्रताम्।
पात्रत्वाद्धनमाप्नोति धनाद्धर्मं ततः सुखम्॥

vidyā dadāti vinayaṃ vinayādyāti pātratām|
pātratvāddhanamāpnoti dhanāddharmaṃ tataḥ sukham||

0
1

Knowledge gives humility, from humility, one attains character; From character, one acquires wealth; from wealth good deeds (righteousness) follow and then happiness.

विद्या विनय देती है, विनय से पात्रता आती है, पात्रता से धन आता है, धन से धर्म होता है, और धर्म से सुख प्राप्त होता है।

विद्या विनय अर्थात विनम्रता प्रदान करती है ,विनम्रता से मनुष्य योग्यता प्राप्त करता है,अपनी योग्यता के दम पर मनुष्य धन प्राप्त करता है और धन से धार्मिक कार्य समपन्न हो सकते है ,धार्मिक कार्य से असीम आनन्द की प्राप्ति होती है ।इसका अर्थ है कि मनुष्य को सदैव सर्वश्रेष्ठ कार्य करने चाहिये उसीसे सुख की प्राप्ति होती है।इसके मूल मे ये है कि मनुष्य को ज्ञानवान होने की महती आवश्यकता है।

அறிவு மனத்தாழ்மையையும், பணிவு தகுதியையும், தகுதி செல்வத்தையும், செல்வம் நேர்மையையும், நீதியும் மகிழ்ச்சியையும் தருகிறது.

Share this Shlok
Share on facebook
Share on twitter
Share on linkedin
Share on whatsapp
Share on telegram

Trending Shloka

Latest Shloka in our Sangrah