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Aadinath Bhagwan Ki Aarti
Also known as: Aadinath Bhagwan Aarti
Aadinath Bhagwan Aarti
daily aarti·jain·bhakti
3 verses
VERSE 0
आरती उतारूँ आदिनाथ भगवान की माता मरुदेवि पिता नाभिराय लाल की रोम रोम पुलकित होता देख मूरत आपकी आरती हो बाबा, आरती हो,
VERSE 1
प्रभुजी हमसब उतारें थारी आरती तुम धर्म धुरन्धर धारी, तुम ऋषभ प्रभु अवतारी तुम तीन लोक के स्वामी, तुम गुण अनंत सुखकारी इस युग के प्रथम विधाता, तुम मोक्ष मार्म के दाता जो शरण तुम्हारी आता, वो भव सागर तिर जाता हे… नाम हे हजारों ही गुण गान की…
VERSE 2