Giriraj ji ki Aarti

Giriraj ji ki Aarti

Krishna known as Govardhan or Giriraj and being the sacred center of Braj, it is identified as a natural form of Krishna.In Pushti sampraday Shree Govardhan is primararily known as Shri Girirajji. Shree Goverdhannathji is the prime deity of Pushtimarg.The respect,love and belief of shree Girirajji is so high that devotees walk bare foot and take an entire circle on the peripheries of the Govardhan Hill.

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ॐ जय जय जय गिरिराज, स्वामी जय जय जय गिरिराज। संकट में तुम राखौ, निज भक्तन की लाज॥ ॐ जय॥ इन्द्रादिक सब सुर मिल तुम्हरौं ध्यान धरें। रिषि मुनिजन यश गावें, ते भवसिन्धु तरै॥ ॐ जय॥ सुन्दर रूप तुम्हारौ श्याम सिला सोहें। वन उपवन लखि-लखि के भक्तन मन मोहें॥ ॐ जय॥ मध्य मानसी गङ्गा कलि के मल हरनी। तापै दीप जलावें, उतरें वैतरनी॥ ॐ जय॥ नवल अप्सरा कुण्ड सुहावन-पावन सुखकारी।। बायें राधा-कुण्ड नहावें महा पापहारी॥ ॐ जय॥ तुम्ही मुक्ति के दाता कलियुग के स्वामी। दीनन के हो रक्षक प्रभु अन्तरयामी॥ ॐ जय॥ हम हैं शरण तुम्हारी, गिरिवर गिरधारी। देवकीनंदन कृपा करो, हे भक्तन हितकारी॥ ॐ जय॥ जो नर दे परिकम्मा पूजन पाठ करें। गावें नित्य आरती पुनि नहिं जनम धरें॥ ॐ जय॥

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