...
Background

Shree Shani Aarti

0
0

Change Bhasha

जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी।

सूरज के पुत्र प्रभु छाया महतारी॥

॥ जय जय श्री शनिदेव.. ॥

श्याम अंग वक्र-दृष्टि चतुर्भुजा धारी।

नीलाम्बर धर नाथ गज की असवारी॥

॥ जय जय श्री शनिदेव.. ॥

क्रीट मुकुट शीश रजित दिपत है लिलारी।

मुक्तन की माला गले शोभित बलिहारी॥

॥ जय जय श्री शनिदेव.. ॥

मोदक मिष्ठान पान चढ़त हैं सुपारी।

लोहा तिल तेल उड़द महिषी अति प्यारी॥

॥ जय जय श्री शनिदेव.. ॥

देव दनुज ऋषि मुनि सुमरिन नर नारी।

विश्वनाथ धरत ध्यान शरण हैं तुम्हारी ॥

॥ जय जय श्री शनिदेव.. ॥

॥ इति श्री शनि आरती ॥

Buy Latest Products

Built in Kashi for the World

ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः