...
Background

Darasana bina tarasata mori akhiyan

0
0

Change Bhasha

दरसन बिना तरसत मोरी अखियां ॥ध्रु०॥ तुमी पिया मोही छांड सीधारे फरकन लागी छतिया ॥द०॥१॥ बस्ति छाड उज्जड किनी व्याकुल भई सब सखियां ॥द०॥२॥ सूरदास कहे प्रभु तुमारे मिलनकूं ज्युजलंती मुख बतिया ॥द०॥३॥

Buy Latest Products

Built in Kashi for the World

ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः