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sachi kaho manamohana

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साची कहो मनमोहन मोसों तो खेलों तुम संग होरी । आज की रेन कहा रहे मोहन कहां करी बरजोरी ॥१॥ मुख पर पीक पीठिपर कंकन हिये हार बिन डोरि । जिय में ओर उपर कछु औरे चाल चलत अछु औरि ॥२॥ मोहि बतावति मोहन नागर कहा मोहि जानत भोरी । भोर भये आये हो मोहन बात कहति कछु जोरी ॥३॥ सूरदास प्रभु ऐसी न कीजे आय मिलो कहा चोरी । मन माने त्यों करति नंदसुत अब आई है होरी ॥४॥

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ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः