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tabmein janakinath kaho

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तबमें जानकीनाथ कहो ॥ध्रु०॥ सागर बांधु सेना उतारो । सोनेकी लंका जलाहो ॥१॥ तेतीस कोटकी बंद छुडावूं बिभिसन छत्तर धरावूं ॥२॥ सूरदास प्रभु लंका जिती । सो सीता घर ले आवो॥३॥ तबमें जानकीनाथ०॥

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ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः