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Baayein se udke daayein disha ko garuda gaya

Dushyant Kumar

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Change Bhasha

बाएँ से उड़के दाईं दिशा को गरुड़ गया

कैसा शगुन हुआ है कि बरगद उखड़ गया

इन खँडहरों में होंगी तेरी सिसकियाँ ज़रूर

इन खँडहरों की ओर सफ़र आप मुड़ गया

बच्चे छलाँग मार के आगे निकल गये

रेले में फँस के बाप बिचारा बिछुड़ गया

दुख को बहुत सहेज के रखना पड़ा हमें

सुख तो किसी कपूर की टिकिया-सा उड़ गया

लेकर उमंग संग चले थे हँसी—खुशी

पहुँचे नदी के घाट तो मेला उजड़ गया

जिन आँसुओं का सीधा तअल्लुक़ था पेट से

उन आँसुओं के साथ तेरा नाम जुड़ गया.

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ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः