चातुर्वर्ण्यं मया सृष्टं गुणकर्मविभागशः ।
तस्य कर्तारमपि मां विद्धयकर्तारमव्ययम्‌ ॥

cāturvarṇyaṅ mayā sṛṣṭaṅ guṇakarmavibhāgaśaḥ.
tasya kartāramapi māṅ viddhyakartāramavyayam৷৷4.13৷৷

ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र- इन चार वर्णों का समूह, गुण और कर्मों के विभागपूर्वक मेरे द्वारा रचा गया है। इस प्रकार उस सृष्टि-रचनादि कर्म का कर्ता होने पर भी मुझ अविनाशी परमेश्वर को तू वास्तव में अकर्ता ही जान॥13॥

Share this Shlok
Share on facebook
Share on twitter
Share on linkedin
Share on whatsapp
Share on telegram

More Shloka to explore

A futuristic Library of Bhartiye Wisdom.

Brahma is building the biggest open-source collection of eternal Bhartiye Gyan in all forms. If you are enlightened do join our team of change-makers.

Shrimad Bhagavad Gita

चातुर्वर्ण्यं मया सृष्टं गुणकर्मविभागशः ।
तस्य कर्तारमपि मां विद्धयकर्तारमव्ययम्‌ ॥

cāturvarṇyaṅ mayā sṛṣṭaṅ guṇakarmavibhāgaśaḥ.
tasya kartāramapi māṅ viddhyakartāramavyayam৷৷4.13৷৷

ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र- इन चार वर्णों का समूह, गुण और कर्मों के विभागपूर्वक मेरे द्वारा रचा गया है। इस प्रकार उस सृष्टि-रचनादि कर्म का कर्ता होने पर भी मुझ अविनाशी परमेश्वर को तू वास्तव में अकर्ता ही जान॥13॥

@beLikeBrahma