हतो वा प्राप्स्यसि स्वर्गं जित्वा वा भोक्ष्यसे महीम्।
तस्मादुत्तिष्ठ कौन्तेय युद्धाय कृतनिशचयः।।

Hato vaa praapsyasi svargam jitvaa vaa bhokshyase mahiim
Tasmaaduttishtha kaunteya yuddhaaya krtanischayah

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ହତୋ ବା ପ୍ରାପସ୍ୟସି ସ୍ବର୍ଗଂ ଜିତ୍ଵା ବା ଭୋକ୍ଷସେ ମହୀମ୍। ତସ୍ମାଦୁତ୍ତିଷ୍ଠ କୌନ୍ତେୟ ଯୁଦ୍ଧୟ କୃତନିଶ୍ଚୟଃ।।

ସ୍ୱଗ ,ଭୂମଣ୍ଡଳ ରାଜ୍ୟ ଭେଗକରିଵ,ସକ୍କଳ୍ପ ବଦ୍ଧ ହୁଅ।

अगर युद्धमें तू मारा जायगा तो तुझे स्वर्गकी प्राप्ति होगी और अगर युद्धमें तू जीत जायगा तो पृथ्वीका राज्य भोगेगा। अतः हे कुन्तीनन्दन! तू युद्धके लिये निश्चय करके खड़ा हो जा।

युद्ध में मरकर तुम स्वर्ग प्राप्त करोगे या जीतकर पृथ्वी को भोगोगे; इसलिय, हे कौन्तेय ! युद्ध का निश्चय कर तुम खड़े हो जाओ।।

Slain thou shalt win Heaven, victorious thou shalt enjoy the earth; therefore arise, O son of Kunti, resolved upon battle.

Sri Aurobindo
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