इन्द्रियाणामधिष्ठात्री भूतानां चाखिलेषु या ।
भूतेषु सततं तस्यै व्याप्त्यै देव्यै नमो नमः ॥

indriyāṇāmadhiṣṭhātrī bhūtānāṃ cākhileṣu yā |
bhūteṣu satataṃ tasyai vyāptyai devyai namo namaḥ ||

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जो जीवों के इंद्रियों की अधिष्ठात्री देवी हैं अर्थात् सभी को देखने, सुनने, समझने, बोलने, स्वाद लेने और सूंघने समेत सभी क्रियाओं की शक्ति देती हैं एवं सब प्राणियों में सदा व्याप्त रहनेवाली हैं, सब में विराजमान उन देवी को बारंबार नमस्कार है ।

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