कवयः किं न पश्यन्ति किं न भक्षन्ति वायसाः ।
मद्यपाः किं न जल्पन्ति किं न कुर्वन्ति योषितः ॥

kavayaḥ kiṃ na paśyanti kiṃ na bhakṣanti vāyasāḥ |
madyapāḥ kiṃ na jalpanti kiṃ na kurvanti yoṣitaḥ ||

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What is it that escapes the observation of poets? What is that act women are incapable of doing? What will drunken people not prate? What will not a crow eat?

वह क्या है जो कवी कल्पना में नहीं आ सकता. वह कौनसी बात है जिसे करने में औरत सक्षम नहीं है. ऐसी कौनसी बकवास है जो दारू पिया हुआ आदमी नहीं करता. ऐसा क्या है जो कौवा नहीं खाता.

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कवयः किं न पश्यन्ति किं न भक्षन्ति वायसाः ।
मद्यपाः किं न जल्पन्ति किं न कुर्वन्ति योषितः ॥

kavayaḥ kiṃ na paśyanti kiṃ na bhakṣanti vāyasāḥ |
madyapāḥ kiṃ na jalpanti kiṃ na kurvanti yoṣitaḥ ||

What is it that escapes the observation of poets? What is that act women are incapable of doing? What will drunken people not prate? What will not a crow eat?
वह क्या है जो कवी कल्पना में नहीं आ सकता. वह कौनसी बात है जिसे करने में औरत सक्षम नहीं है. ऐसी कौनसी बकवास है जो दारू पिया हुआ आदमी नहीं करता. ऐसा क्या है जो कौवा नहीं खाता.

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