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श्रीमद् भगवद्गीता

नियतं कुरु कर्म त्वं कर्म ज्यायो ह्यकर्मणः।
शरीरयात्रापि च ते न प्रसिद्ध्येदकर्मणः।।

niyataṃ kuru karma tvaṃ karma jyāyo hyakarmaṇaḥ।
śarīrayātrāpi ca te na prasiddhyedakarmaṇaḥ॥
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Translations

तू शास्त्रविधिसे नियत किये हुए कर्तव्य-कर्म कर; क्योंकि कर्म न करनेकी अपेक्षा कर्म करना श्रेष्ठ है तथा कर्म न करनेसे तेरा शरीर-निर्वाह भी सिद्ध नहीं होगा।

Swami Ramsukhdas

तू शास्त्रविहित कर्तव्यकर्म कर; क्योंकि अकर्म की अपेक्षा कर्म श्रेष्ठ है तथा अकर्म से तो तेरा शरीर-निर्वाह भी सिद्ध नहीं होगा ।

आपके लिए जो निर्धारित कार्य है, उसे मन-बुद्धि लगाकर मनोयोगपूर्वक करो। क्योंकि कर्म न करने की अपेक्षा कर्म करना ही सबसे बढ़िया मार्ग है। और अगर कर्म नहीं करोगे तो जीवनयात्रा-शरीर का निर्वाह करना भी असंभव हो जाएगा।

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श्रीमद् भगवद्गीता

नियतं कुरु कर्म त्वं कर्म ज्यायो ह्यकर्मणः।
शरीरयात्रापि च ते न प्रसिद्ध्येदकर्मणः।।

niyataṃ kuru karma tvaṃ karma jyāyo hyakarmaṇaḥ।
śarīrayātrāpi ca te na prasiddhyedakarmaṇaḥ॥
तू शास्त्रविधिसे नियत किये हुए कर्तव्य-कर्म कर; क्योंकि कर्म न करनेकी अपेक्षा कर्म करना श्रेष्ठ है तथा कर्म न करनेसे तेरा शरीर-निर्वाह भी सिद्ध नहीं होगा।
तू शास्त्रविहित कर्तव्यकर्म कर; क्योंकि अकर्म की अपेक्षा कर्म श्रेष्ठ है तथा अकर्म से तो तेरा शरीर-निर्वाह भी सिद्ध नहीं होगा ।
आपके लिए जो निर्धारित कार्य है, उसे मन-बुद्धि लगाकर मनोयोगपूर्वक करो। क्योंकि कर्म न करने की अपेक्षा कर्म करना ही सबसे बढ़िया मार्ग है। और अगर कर्म नहीं करोगे तो जीवनयात्रा-शरीर का निर्वाह करना भी असंभव हो जाएगा।

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