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येषां न विद्या न तपो न दानं
ज्ञानं न शीलां न गुणो न धर्मः ।
ते मर्त्यलोके भुवि भारभूता
मनुष्यरूपेण मृगाश्चरन्ति ॥

yeṣāṃ na vidyā na tapo na dānaṃ
jñānaṃ na śīlāṃ na guṇo na dharmaḥ |
te martyaloke bhuvi bhārabhūtā
manuṣyarūpeṇa mṛgāścaranti ||

The beggar is a miser’s enemy; the wise counsellor is the fool’s enemy; her husband is an adulterous wife’s enemy; and the moon is the enemy of the thief

भिखारी यह कंजूस आदमी का दुश्मन है. एक अच्छा सलाहकार एक मुर्ख आदमी का शत्रु है. वह पत्नी जो पर पुरुष में रूचि रखती है, उसके लिए उसका पति ही उसका शत्रु है. जो चोर रात को काम करने निकलता है, चन्द्रमा ही उसका शत्रु है.

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Chankya Niti

येषां न विद्या न तपो न दानं
ज्ञानं न शीलां न गुणो न धर्मः ।
ते मर्त्यलोके भुवि भारभूता
मनुष्यरूपेण मृगाश्चरन्ति ॥

yeṣāṃ na vidyā na tapo na dānaṃ
jñānaṃ na śīlāṃ na guṇo na dharmaḥ |
te martyaloke bhuvi bhārabhūtā
manuṣyarūpeṇa mṛgāścaranti ||

The beggar is a miser’s enemy; the wise counsellor is the fool’s enemy; her husband is an adulterous wife’s enemy; and the moon is the enemy of the thief
भिखारी यह कंजूस आदमी का दुश्मन है. एक अच्छा सलाहकार एक मुर्ख आदमी का शत्रु है. वह पत्नी जो पर पुरुष में रूचि रखती है, उसके लिए उसका पति ही उसका शत्रु है. जो चोर रात को काम करने निकलता है, चन्द्रमा ही उसका शत्रु है.

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