Brahma

Be the change in order to reclaim the lost glory of Bhārat

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चिंतनशील लेखक, प्रगतिशील लेख

•  4 mins read
परमात्मा की बनाई इस सृष्टि को कई अर्थों में अदृभुत एवं विलक्षण कहा जा सकता है । एक विशेषता इस सृष्टि की यह है कि यहाँ हर छोटे-से-छोटे घटक की अपनी एक विशिष्ट पहचान, अपनी एक मौलिकता है जो किसी दूसरे को उपलब्ध नहीं । एक चींटी, एक मक्खी के भीतर जो खासियत, जो विशेषता...
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• 4 days ago
 पर्यावरण से हमारा जीवन जुड़ा हुआ है और पर्यावरण में ही पंचतत्व ( पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश) समाहित हैं, जिनसे मिलकर हमारा शरीर...

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• 5 days ago
वर्तमान दुनिया बहुत हल्के लोगों के हाथों में है ! हल्के लोग राष्ट्राध्यक्ष बने हुए हैं, हल्के लोग धर्माधीश.. !! हल्के लोगों के हाथों में...

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• 5 days ago
Today we have not yet recovered even a quarter of the deeper meaning of the Vedic mantras, much less find the Vedic mantras explained in...

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• 6 days ago
  व्यक्ति के जीवन में परिवार की भूमिका बहुत ही महत्त्वपूर्ण होती है । परिवार में रहकर ही व्यक्ति सेवा, सहकार, सहिष्णुता आदि मानवीय गुणों...

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• 1 week ago
Garuda, a very popular character in the history of Sanatana Dharma. I think there was no one in Sanatana Dharma who didn’t admire Bhagwan Garuda...

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• 1 week ago
Hindu concepts of Hiranyagarbha (golden womb) and Brahmanda (the first egg), are comparable to cosmic egg origin systems. The Bhagavata Purana, Brahmanda Purana, Vayu Purana...

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śloka of the day

!! युग – युगांतर से कर्त्तव्य पथ का मार्गदर्शन करने वाले श्लोक !!

 असतो मा सद्गमयतमसो मा ज्योतिर्गमय ।
मृत्योर्मा अमृतं गमय शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥

Adhyay 1.3
Shloka 28
हे प्रभु! मुझे असत्य से सत्य की ओर । मुझे अन्धकार से प्रकाश की ओर । और मुझे मृत्यु से अमरता की ओर ले चलो॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
O Lord! Lead me from ignorance to truth, Lead me from darkness to light, Lead me from death to deathlessness, Aum peace, peace, peace.
ஏய் ஆண்டவரே! அறியாமையிலிருந்து சத்தியத்திற்கு எங்களை வழிநடத்துங்கள், இருளில் இருந்து வெளிச்சத்திற்கு எங்களை இட்டுச் செல்லுங்கள், மரணத்திலிருந்து அழியாத நிலைக்கு இட்டுச் செல்லுங்கள். ॐ அமைதி, அமைதி, அமைதி.
ਹੇ ਸੁਆਮੀ, ਸਾਨੂੰ ਅਗਿਆਨਤਾ ਤੋਂ ਸੱਚ ਵੱਲ ਲੈ ਜਾਵੋ, ਹਨੇਰੇ ਤੋਂ ਚਾਨਣ ਵੱਲ ਲੈ ਜਾਵੋ, ਮੌਤ ਤੋਂ ਸਾਨੂੰ ਅਮਰਤਾ ਵੱਲ ਲੈ ਜਾਵੋ, ॐ ਸ਼ਾਂਤੀ, ਸ਼ਾਂਤੀ, ਸ਼ਾਂਤੀ
ହେ ପ୍ରଭୁ, ଆମକୁ ଅଜ୍ଞତାରୁ ସତ୍ୟକୁ ନେଇଯାଅ, ଅନ୍ଧକାରରୁ ଆଲୋକକୁ ନେଇଯାଅ, ମୃତ୍ୟୁରୁ ଅମରତାକୁ, ॐ ଶାନ୍ତି, ଶାନ୍ତି, ଶାନ୍ତି |
ಓ ಸ್ವಾಮಿ, ನಮ್ಮನ್ನು ಅಜ್ಞಾನದಿಂದ ಸತ್ಯಕ್ಕೆ ಕರೆದೊಯ್ಯಿರಿ, ನಮ್ಮನ್ನು ಕತ್ತಲೆಯಿಂದ ಬೆಳಕಿಗೆ ಕರೆದೊಯ್ಯಿರಿ, ಸಾವಿನಿಂದ ಅಮರತ್ವಕ್ಕೆ ನಮ್ಮನ್ನು ಕರೆದೊಯ್ಯಿರಿ, ॐ ಶಾಂತಿ, ಶಾಂತಿ, ಶಾಂತಿ.
הו, אדון, הוביל אותנו מבורות לאמת, הוביל אותנו מחושך לאור, הוביל אותנו ממוות לאלמוות, ॐ שלום, שלום, שלום.

 असतो मा सद्गमयतमसो मा ज्योतिर्गमय ।
मृत्योर्मा अमृतं गमय शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥

Brihadaranyaka Upanishad
• Chapter 1.3
• Shlok 28

तस्मादसक्तः सततं कार्यं कर्म समाचर।
असक्तो ह्याचरन्कर्म परमाप्नोति पूरुषः।।

श्रीमद् भगवद्गीता
• Chapter 3
• Shlok 19

नियतं कुरु कर्म त्वं कर्म ज्यायो ह्यकर्मणः।
शरीरयात्रापि च ते न प्रसिद्ध्येदकर्मणः।।

श्रीमद् भगवद्गीता
• Chapter 3
• Shlok 8

अथातः संप्रत्तिः—यदा प्रैष्यन्मन्यतेऽथ पुत्रमाह, त्वं ब्रह्म, त्वं यज्ञः, त्वं लोक इति; स पुत्रः प्रत्याह, अहं ब्रह्म, अहं यज्ञः, अहं लोक इति;

Brihadaranyaka Upanishad
• Chapter 1.5
• Shlok 17

तथा च स्मर्यत योजनानां सहस्रम् द्वे द्वे शते द्वे च योजने । एकेन निमिषार्धेन क्रममाण नमोऽस्तु ते ॥

Thaiththareeya Brahmana

क्वाहं तमो-महद्-अहं-ख-चराग्नि-वार्-भू-
संवेष्टिताण्ड-घट-सप्त-वितस्ति-कायः ।
क्वेदृग्-विधाविगणिताण्ड-पराणु-चर्या-
वाताध्व-रोम-विवरस्य च ते महित्वम् ।।

Srimad Bhagvatam
• Chapter 10.14
• Shlok 11

Collectionब्रह्मसंग्रह

!! Collecting and structuring Indic things as they need to be !!

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